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स्त्री

 तुम स्त्री को स्वतंत्रता , सम्मान , प्रेम देकर तो देखो ,      वो सचमुच तुम्हें बहुत कुछ दे सकती है । ©दीपिका प्रजापति:-- स्त्री की पाज़ेब उनकी बेड़ियां नहीं पाबन्दियां नहीं है , बल्कि उसकी झंकार में विजय के स्वर है । किसी पर लगाईं रोक टोक से तुम कुछ भी हासिल नहीं कर सकते । किसी से प्रेम पाने के लिए तुम्हें घुटनों के बल बैठकर गुलाब देना भी पड़ेगा , वहाँ गुलाब महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण है तुम्हारी अकड़ का झुकना। समय पाने के लिए तुम्हें ख़ुद को समय के साथ बदलना होगा , पुरानी सोच नये जमाने में नहीं चलती । पंख देकर देखो नारियों को वो सचमुच तुम्हारे लिए आसमां से सितारे ला सकती है। 🌺🌺🌺🌸🌸🌸🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌸🌸🌸🌸🌸