छोरी रा पईसा

छोरियों रा पईसा लेन

कतरो मोटो काम करों

हो ... छोरियाँ रा 

पईसा थै सम्बधी सूं

नहीं थै थारी ही छोरी 

रे पास सूं लेवो हों।


थै  कई सोचो ४-५ लाख

रुपिया मिनख रे घर में

पड्या है कै , उधार लेन 

तो कठे जमीन बेच ने

लावे है , फेर थारी ही 

छोरी जा ने एक एक

रुपया चुकावे है ।


मोटा मिनख केहवे है

थारे कन्ने छोरी हैं तो

थू सबसूँं अमीर हैं

पण थू इयू अमीर बणवा

लाग्यों तो कठे हाली।


छोरी रे जणवा माथे इज

थै तो उण रो मोल करों

हो , म्हैं तो म्हारी छोरी

ने ६-७ लाख सूँ निची

नी देऊँ ... थाने आ बात

करता भी शरम कोनी 

आवे..! 


क्यों पईसा रे लारे थै अतरा

गेल्ला होग्या , सब चीज़ा नि

मिले हैं पईसा सूँ , बेटी तो 

अनमोल रत्न हैं मानवी 

क्यों थै उण ने व्यापार

बणावों हो थै खुद थारी

छोरी माथे कलंक लगावों

हो, पईसा देण कै काम होवे

थाने भी ठा है सब म्हारा 

सबद नि लिख सके हैं।


कठे सरकारी नौकरी तो कठे 

पईसा देख लिया , थै कदै

छोरी री खुसी नि देखी ।


मिरच रोटी देख ने छोरी देवों

ब्याज माथे लिदोड़ा पईसा

री जेब देख ने मत देवों।


मिनख पंचायती कर ने

आप आपरे घरे हाली ,

थारौ घर थाने देखणों हैं।

पंच कदी खुद रे घर

री हाँची पंचायती नि

किदी थारै घर री का 

करी.........!


खुद रा नेवा पकवो

बिजो रा ठोम कियूं

खड़कावो हो ।


छोरा आळा पईसा लेवें

तो दहेज़ , अर छोरी

आळा लेवें तो कै केहवों

सबद नि है ना थारै कन्ने ?

दहेज इयू भी गलत है

और इयू भी , थै लेवों के 

मैं देवों।


छोरियाँ आज़ादी में जिवे

पण वा कैद भी है आज़ादी

में, अतरी मनमानी मत करों

कि कल थानै कठे छोरी 

देखण ने नि मले ...

मर मर ने जिवणा ती 

घणों आच्छों है इक दण

मर जाणों।

कद आटा साटा में कुआँ

में गिरे हैं, अ'र बाबोसा

थै लिदा पईसा रो मोळ

चुकावता चुकावता

रस्सी सूँ टूपो खा जावे।


मिरच रोटी खाओ घणों

मती विचारौ।

लक्ष्मी नी लक्ष्मी जीकण राखों

कोई वस्तु समझ ने बेच मत 

दिजों।


(छोरियों री कमी नि हैं , आपरे सोचवा में कमी है।

समाज विकंलाग है मानसिक तौर पे । बेटी बचाओ सा नि तो मर जासी 🙏🏻😐)

@बाईसा री कलम स्यूं दीप ✍️


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